मैथिली साहित्य
मैथिली साहित्य महासभाक ब्लॉग.......................... मैथिली साहित्य कें प्रोन्नतिशील बनाबय लेल.
शनिवार, 31 जनवरी 2015
मसम : अवधारणा पत्र
मैथिली हमर सभक मातृभाषा
अछि। अपन भाषा लेल सबकें
मोनमे अनन्त अनुराग होइत अछि। मुदा हमरा सभक लेल इ गौरवक गप अछि जे मैथिली साहित्यक स्थान भारतीय भाषा मध्य
महत्वपूर्ण अछि। सर्वविदित अछि जे मैथिली भाषाक स्वतंत्र अस्तित्व अछि। एकर व्याकरणक
विशिष्ट पहचान अछि। एकर अपन लिपि अछि। एकर साहित्य समृद्ध अछि।
मैथिली साहित्यक
परिदृश्य पर दृष्टिपात करैत मिथिलाक सेनानी ओ विद्वान डॉ. जयकान्त मिश्र'क कथन
छनि जे –
मैथिली एक स्वतंत्र
समृद्धशाली भाषा-साहित्य थीक। एहिमे सुदीर्घ, अविच्छिन्न आ क्रमबद्ध साहित्य-लेखनक परम्परा रहलैक अछि।
मैथिली जीवन्त भाषा-साहित्य थीक। निरन्तर साहित्य-लेखन चलि रहल छैक। मैथिलीक अपन
लिपि आ व्याकरण छैक। शब्द आ लोकोक्ति छैक। विपुल लोकसाहित्यक भंडार छैक।"
बहुत रास मैथिली सेनानी आ
साहित्यकार निरंतर त्याग करैत रहला, निरंतर सृजन करैत रहला तखन जा क' मैथिलीक
एहन गौरवशाली परिदृश्य बनल। कविता, कथा, उपन्यास, नाटक, आलोचना, अनुवाद सहित
साहित्यक सभ विधामे भरपूर साहित्य सृजन कएल गेल। चौदहम शताब्दी सं मैथिली
साहित्य समृद्ध होमय लागल। एहि कालमे ज्योतिरीश्वर ठाकुर ऐतिहासिक 'वर्ण रत्नाकर'
ग्रंथक रचना कएलनि। ओकर बाद विद्यापतिक साहित्य साधना सर्वविदित अछि। अनेक
पत्र-पत्रिका बहराएल। सर्वप्रथम मिथिलेत्तर क्षेत्र जयपुर सं 'मैथिल हित साधन
(1905)' पत्रिका बहराएल। पत्र-पत्रिका जगतमे 'मिथिला मिहिर (1907)क' योगदान उल्लेखनीय
रहल। अपन माटी आ भाषाक प्रति समर्पण-भावक कारण रांची, धनबाद, जमशेदपुर, आगरा, वाराणसी,
इलाहाबाद, अजमेर, जयपुर, राउरकेला, मुंबई सहित देशक अनेक महानगरमे मैथिल प्रवासी
सभ अदम्य जीवटताक परिचय दैत अनेक दिक्कत के बादो मैथिली साहित्यिक पत्रिका बाहर
करैत रहला। हं, ई अवश्य छल जे कोनो, पत्रिका, एक साल, कोनो दू साल बहराइत छल मुदा
फेर किछुए दिनक बाद नव पत्रिका शुरू भ' जाइत छल।
ई प्रश्न सहज उपस्थित कएल
जा सकैत अछि जे बहुत रास मैथिली साहित्यिक संस्था अछि तखन फेर एकटा नव संस्था
किएक? एकर की विचारधारा रहत? एकर कार्यपद्धति की होएत? मिथिला आंदोलनक प्रवाहमे ई एकटा अवरोध सेहो मानल
जाएत अछि, जे एक के बाद एक नव संगठन बनैत अछि आ किछुए दिन बाद निष्क्रिय भ' जाएत
अछि।
कोनो समाज साहित्य द्वारा
संस्कारित आ जाग्रत होइत अछि। वैश्वीकरण आ बाजारवादक जमानामे साहित्य मनुखता कें
जीवित रखैत अछि। साहित्य सं अन्यायक
प्रतिरोध होइत अछि त' सकारात्मक परिवर्तनो साकार होएत अछि।
दिल्लीमे लाखो
प्रवासी मैथिल छथि। एहि ठाम अनेको स्थान पर भव्य तरीका सं 'विद्यापति पर्व'
आयोजित भ' रहल अछि। मैथिल रंगमंचक स्थिति प्रभावी अछि। मुदा, सक्रिय साहित्यिक
संस्थाक अभाव। मैथिली प्राचीन भाषा अछि। एकर संरक्षण आ संवर्धन लेल एवं दलगत राजनीति आ जाति-मजहबक भेद सं मुक्त एकटा
नव संस्था 'मैथिली साहित्य
महासभा, दिल्ली'क गठन प्रस्तावित अछि।
एहि संस्था केर गतिविधि
रहत :
- मैथिलक मध्य साहित्यिक अभिरूचि उत्पन्न केनाय।
- मिथिलाक्षर लिपि केर विकास।
- काव्य गोष्ठीक आयोजन।
- मैथिली पोथीक प्रकाशन।
- मैथिली साहित्य उत्सवक आयोजन।
- मैथिली साहित्यकारक आर्थिक सुरक्षा लेल कोष समितिक गठन।
- विद्यापति स्मृति व्याख्यानमाला केर आयोजन।
- डॉ. जयकान्त मिश्र एवं भोलालाल दास स्मृति पुरस्कार।
आगामी 21 फरवरी 2015 (शनि दिन) कें डिप्टी स्पीकर हॉल, कंस्टीट्यूशन क्लब, नई दिल्लीमे प्रात: 11 बजे सं दुपहर के 2 बजे धरि 'मैथिली साहित्य महासभा, दिल्ली' केर 'स्थापना सम्मेलन' आयोजित होमय बला अछि। एहि सम्मेलनमे अपनेक उपस्थिति प्रार्थनीय अछि। कृपया उपस्थित भ' अपन मातृभाषा मैथिली कें प्रोन्नतिशील बनाबयमे अपन योगदान सुनिश्चित करी।
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